< यहेजकेल 4 >
1 “अब, हे मनुष्य के पुत्र, तुम एक मिट्टी की ईंट लो, उसे अपने सामने रखो ओर उस पर येरूशलेम शहर का चित्र बनाओ.
"Du Menschensohn! Nimm dir jetzt einen Ziegelstein, leg diesen vor dich hin und zeichne drauf die Stadt Jerusalem!
2 तब इसकी घेराबंदी करो: इसके विरुद्ध घेराबंदी की रचना करो, इस पर एक ढलान बनाओ, इसके विरुद्ध शिविर खड़े करो और इसके चारों ओर युद्ध के यंत्र लगाओ.
Mach einen Wall um sie! Bau einen Turm dawider! Schütt einen Damm dagegen, stell Heere auf dawider! Laß ringsum Sturmböcke angreifen!
3 तब लोहे की एक थाली लो, और इसे अपने और शहर के बीच एक लोहे की दीवार के रूप में रखो और अपना मुंह इसकी ओर करो. यह घेराबंदी में होगा, और तुम इस पर घेरा डालोगे. यह इस्राएल के लोगों के लिये एक चिन्ह होगा.
Dann hol dir eine Eisenpfanne und stell als Eisenwand sie zwischen dich und diese Stadt und richte unverwandt dein Antlitz gegen sie, als wäre sie jetzt in Belagerung und du wärst ihr Belagerer! Ein Zeichen sei dies für das Haus von Israel!
4 “तब तुम अपनी बायीं करवट पर लेट जाओ और इस्राएल के लोगों के पाप को अपने ऊपर रखो. तुम्हें अपने करवट पर लेटे रहकर काफ़ी दिनों तक उनके पाप का बोझ सहना है.
Dann aber leg dich auf die linke Seite! Trag so die Sündenschuld des Hauses Israel! So viele Tage, wie du darauf liegst, hast du an ihrer Missetat zu tragen.
5 उन्होंने जितने साल पाप में लगाए हैं, मैंने उतने ही दिन तुम्हारी इस स्थिति के लिए ठहराए हैं अर्थात् 390 दिन तक तुम इस्राएल के लोगों के पाप को सहते रहोगे.
Ich will dir nämlich auferlegen ihrer Sünden Jahre, in Tage umgewandelt, dreihundertneunzig Tage. So lang trag du die Sündenschuld des Hauses Israel!
6 “इस काम को पूरा कर लेने के बाद, तुम फिर से लेट जाना, पर इस समय अपनी दायीं करवट पर, और तुम यहूदिया के लोगों के पाप का भार सहोगे. मैंने तुम्हारे लिए चालीस दिन ठहराए हैं, हर साल के लिये एक दिन.
Bist du damit zu Ende, dann leg zum zweitenmal dich auf die rechte Seite, und trag die Schuld des Hauses Juda vierzig Tage! Ich setze einen Tag für jedes Jahr dir an.
7 तब तुम अपना मुंह येरूशलेम की घेराबंदी की ओर करना और खुली बांह के साथ इसके विरुद्ध भविष्यवाणी करना.
Dein Antlitz richte unverwandt auf die Belagerung Jerusalems! Es sei dein Arm entblößt! Weissage so dawider!
8 मैं तुम्हें रस्सियों से बांध दूंगा, ताकि तुम करवट न बदल सको, जब तक कि तुम अपने घेराबंदी के दिनों को पूरा न कर लो.
Ich binde dich mit Stricken, damit du dich nicht umwendest, bis du die Tage überstanden, da du belagert bist.
9 “तुम गेहूं, जौ, सेम, दाल, बाजरा और कठिया लो; उन्हें एक मर्तबान में रखो और उनका उपयोग अपने लिए रोटी बनाने में करो. तुम्हें इसको उन 390 दिनों के दौरान खाना है, जब तुम अपनी करवट पर लेटे रहोगे.
Alsdann nimm Weizen, Gerste, Bohnen, Linsen, Hirse, Spelt, tu sie in ein Gefäß zusammen und mach dir Brot daraus! Die ganze Zeit, die du auf deiner Seite liegst, dreihundertneunzig Tage, sollst du's essen!
10 प्रतिदिन 20 शेकेल का भोजन वजन करके खाना है और इसे एक नियत समय पर ही खाना है.
Die Speise, die du essen sollst, beträgt nach dem Gewicht nur zwanzig Ringe für den Tag. Du sollst von einer Stunde bis zur gleichen des andern Tags sie essen.
11 पानी भी एक हीन का छठवां भाग नाप लेना और उसे नियत समय पर पीना.
Auch Wasser sollst du abgemessen trinken, ein Sechstel Maß. Du sollst von einer Stunde bis zur gleichen des andern Tags es trinken.
12 जौ की एक रोटी बनाकर खाना; इसे लोगों के देखते में पकाना और ईंधन के रूप में मनुष्य के मल का उपयोग करना.”
Als Gerstenkuchen sollst du es verzehren. Den aber backe du vor ihren Augen auf Ballen Menschenkotes!"
13 फिर याहवेह ने कहा, “इस प्रकार इस्राएल के लोग उन जनताओं के बीच अशुद्ध भोजन करेंगे, जहां मैं उन्हें भगा दूंगा.”
Es sprach der Herr: "Genauso essen ekelhaftes Brot die Söhne Israels bei Heidenvölkern, unter die ich sie zerstreue."
14 तब मैंने कहा, “हे परम प्रधान याहवेह! ऐसा न हो. मैंने कभी अपने आपको अशुद्ध नहीं किया है. अपने जवानी से लेकर अब तक, मैंने कभी कोई मरा हुआ या जंगली जानवरों के द्वारा फाड़ डाला गया पशु नहीं खाया है. मेरे मुंह में कभी भी किसी भी प्रकार का अशुद्ध मांस नहीं गया है.”
Ich aber sprach: "Ach Herr, o Herr! Ich habe niemals mich verunreinigt und nie Gefallenes gegessen, und nie Zerrissenes, niemals von meiner Jugend an bis jetzt. Nie kam in meinen Mund verdorbenes Fleisch."
15 तब उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा, मैं तुम्हें मनुष्य के मल के बदले गाय के गोबर पर रोटी सेंकने की अनुमति देता हूं.”
Er sprach zu mir: "Statt Menschenkots bewillige ich dir Rindermist; mit solchem magst du dir dein Brot bereiten."
16 फिर उसने मुझसे यह भी कहा, “हे मनुष्य के पुत्र, मैं येरूशलेम का भोजन-पानी बंद करनेवाला हूं. लोग प्रतिदिन का भोजन चिंतित होकर खाएंगे और प्रतिदिन का पानी निराश होकर पिएंगे,
Er sprach zu mir:"Du Menschensohn! Sieh! Ich lasse in Jerusalem an Brot es nicht ermangeln, daß man's nur nach Gewicht verzehrt und unter Angst und Wasser trinkt nach zugemessenem Maß mit Schrecken.
17 क्योंकि भोजन और पानी बहुत थोड़ा होगा. वे एक दूसरे को देखकर भयभीत होंगे और अपने पाप के कारण नाश हो जाएंगे.
An Brot und Wasser Mangel leidend, werden sie, einander starr anblickend, zur Strafe ihrer Missetat verschmachten."