< 2 राजा 4 >
1 भविष्यद्वक्ता मंडल के भविष्यवक्ताओं में से एक की पत्नी ने एलीशा की दोहाई दी, “आपके सेवक, मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है. आपको मालूम ही है कि आपके सेवक के मन में याहवेह के लिए कितना भय था. अब हालत यह है कि जिसका वह कर्ज़दार था वह मेरे दोनों पुत्रों को अपने दास बनाने के लिए आ खड़ा हुआ है.”
১একদিন ভাববাদীদের সন্তানদের মধ্যে এক জনের স্ত্রী কেঁদে ইলীশায়কে বলল, “আপনার দাস আমার স্বামী মারা গেছেন; আপনি জানেন, আপনার দাস সদাপ্রভুকে ভয় করতেন; এখন মহাজন আমার দুই ছেলেকে তার দাস বানাবার জন্য নিয়ে যেতে এসেছে।”
2 एलीशा ने उससे पूछा, “मैं तुम्हारे लिए क्या करूं? बताओ क्या-क्या बाकी रह गया है तुम्हारे घर में?” उस स्त्री ने उत्तर दिया, “आपकी सेविका के घर में अब तेल का एक पात्र के अलावा कुछ भी बचा नहीं रह गया है.”
২ইলীশায় তাকে বললেন, “আমি তোমার জন্য কি করতে পারি? বল দেখি, তোমার ঘরে কি আছে?” সে বলল, “একবাটি তেল ছাড়া আপনার দাসীর আর কিছু নেই।”
3 एलीशा ने उससे कहा, “जाओ और अपने सभी पड़ोसियों से खाली बर्तन मांग लाओ और ध्यान रहे कि ये बर्तन गिनती में कम न हों.
৩তখন তিনি বললেন, “যাও, তুমি বাইরে গিয়ে তোমার সমস্ত প্রতিবেশীদের কাছ থেকে খালি পাত্র চেয়ে আন, মাত্র অল্প কয়েকটি আনবে না।
4 तब उन्हें ले तुम अपने पुत्रों के साथ कमरे में चली जाना और दरवाजा बंद कर लेना. तब इन सभी बर्तनों में तेल उण्डेलना शुरू करना. जो जो बर्तन भर जाएं उन्हें अलग रखते जाना.”
৪তারপর তুমি ও তোমার ছেলেরা ঘরে ঢুকে দরজা বন্ধ করে দেবে এবং সেই পাত্রতে তেল ঢালবে; আর একটা করে পাত্র ভর্তি হলে পর সেটা সরিয়ে রাখবে।”
5 तब वह वहां से चली गई. अपने पुत्रों के साथ कमरे में जाकर उसने दरवाजा बंद कर लिया. वह बर्तनों में तेल उंडेलती गई और पुत्र उसके सामने खाली बर्तन लाते गए.
৫পরে সেই স্ত্রীলোকটী তাঁর কাছ থেকে চলে গেল, আর সে ও তার ছেলেরা গৃহে ঢুকে দরজা বন্ধ করে দিল; তারা বার বার পাত্র আনতে লাগল এবং সে তেল ঢালতেই থাকল।
6 जब सारे बर्तन भर चुके, उसने अपने पुत्र से कहा, “और बर्तन ले आओ!” पुत्र ने इसके उत्तर में कहा, “अब कोई बर्तन नहीं है.” तब तेल की धार थम गई.
৬সব পাত্র ভরে গেলে পর সে তার ছেলেকে বলল, “আরো পাত্র নিয়ে এস।” ছেলেটি বলল, “আর পাত্র নেই।” তখন তেল পড়া বন্ধ হয়ে গেল।
7 उसने परमेश्वर के जन को इस बात की ख़बर दे दी. और परमेश्वर के जन ने उस स्त्री को आदेश दिया, “जाओ, यह तेल बेचकर अपना कर्ज़ भर दो.” जो बाकी रह जाए, उससे तुम और तुम्हारे पुत्र गुज़ारा करें.
৭পরে সে গিয়ে ঈশ্বরের লোককে খবর দিল। তিনি বললেন, “যাও, সেই তেল বিক্রি করে তোমার দেনা শোধ করে দাও এবং যা বাকি থাকবে তা দিয়ে তুমি ও তোমার ছেলেরা দিন কাটাও”।
8 एक दिन एलीशा शूनेम नाम के स्थान पर गए. वहां एक धनी स्त्री रहती थी. उसने एलीशा को विनती करके भोजन पर बुलाया. इसके बाद जब कभी एलीशा वहां से जाते थे, वहीं रुक कर भोजन कर लेते थे.
৮একদিন ইলীশায় শূনেমে যান, সেখানে একজন ধনী মহিলা ছিলেন; তিনি তাঁকে আগ্রহ সহকারে খাওয়ার জন্য নিমন্ত্রণ করলেন। পরে যতবার তিনি সেই পথ দিয়ে যেতেন, ততবারই সেই বাড়িতে খাওয়া দাওয়া করবার জন্য যেতেন।
9 उस स्त्री ने अपने पति से कहा, “सुनिए, अब तो मैं यह समझ गई हूं कि यह व्यक्ति, जो हमेशा इसी मार्ग से जाया करते हैं, परमेश्वर के पवित्र जन हैं.
৯আর সেই মহিলা তাঁর স্বামীকে বললেন, “দেখ, আমি বুঝতে পেরেছি যে, এই যে ব্যক্তি আমাদের কাছ দিয়ে যখন তখন যাতাযাত করেন, তিনি ঈশ্বরের একজন পবিত্র লোক।
10 हम छत पर दीवारें उठाकर एक छोटा कमरा बना लें, उनके लिए वहां एक बिछौना, एक मेज़ एक कुर्सी और एक दीपक रख दें, कि जब कभी वह यहां आएं, वहां ठहर सकें.”
১০অনুরোধ করি, এস, আমরা ছাদের উপরে একটা ছোট ঘর তৈরী করি এবং তার মধ্যে তাঁর জন্য একটা খাট, একটা টেবিল, একটা চেয়ার ও একটা বাতিদান রাখি; তাহলে তিনি আমাদের কাছে আসলে ওখানে থাকতে পারবেন।”
11 एक दिन एलीशा वहां आए और उन्होंने उस कमरे में जाकर आराम किया.
১১একদিন ইলীশায় সেখানে এসে সেই উপরের কুঠরীতে গিয়ে শুয়ে থাকলেন।
12 उन्होंने अपने सेवक गेहज़ी से कहा, “शूनामी स्त्री को बुला लाओ.” वह आकर उनके सामने खड़ी हो गई.
১২পরে তিনি তাঁর চাকর গেহসিকে বললেন, “তুমি ঐ শূনেমীয় স্ত্রীলোকটীকে ডাক।” সে তাঁকে ডাকলে স্ত্রীলোকটী এসে তাঁর সামনে দাঁড়ালেন।
13 एलीशा ने गेहज़ी को आदेश दिया, “उससे कहो, ‘देखिए, आपने हम दोनों का ध्यान रखने के लिए यह सब कष्ट किया है; आपके लिए क्या किया जा सकता है? क्या आप चाहती हैं कि किसी विषय में राजा के सामने आपकी कोई बात रखी जाए, या सेनापति से कोई विनती की जाए?’” उस स्त्री ने उत्तर दिया, “मैं तो अपनों ही के बीच में रह रही हूं!”
১৩তখন ইলীশায় গেহসিকে বললেন, “ওঁনাকে বল, ‘দেখুন, আমাদের জন্য এত চিন্তা করলেন, এখন আমরা আপনার জন্য কি করতে পারি? রাজা বা সেনাপতির কাছে আপনার কি কোনো অনুরোধ আছে’?” উত্তরে তিনি বললেন, “আমি আমার নিজের লোকদের মধ্যে বসবাস করছি।”
14 तब उन्होंने पूछा, “तब इस स्त्री के लिए क्या किया जा सकता है?” गेहज़ी ने उत्तर दिया, “उसके कोई पुत्र नहीं है, और उसके पति ढलती उम्र के व्यक्ति हैं.”
১৪পরে ইলীশায় বললেন, “তবে তাঁর জন্য কি করতে হবে?” গেহসি বলল, “নিশ্চয়ই তাঁর কোন ছেলে নেই, স্বামীও বুড়ো হয়ে গেছেন।”
15 एलीशा ने कहा, “उसे यहां बुलाओ.” जब वह स्त्री आकर द्वार पर खड़ी हो गई,
১৫ইলীশায় বললেন, “তাঁকে ডাক,” পরে তাঁকে ডাকলে তিনি এসে দরজার কাছে দাঁড়ালেন।
16 एलीशा ने उससे कहा, “अगले साल इसी मौसम में लगभग इसी समय तुम्हारी गोद में एक पुत्र होगा.” वह स्त्री कहने लगी, “नहीं, मेरे स्वामी! परमेश्वर के जन, अपनी सेविका को झूठी आशा न दीजिए.”
১৬তখন ইলীশায় বললেন, “আগামী বছরের এই দিনের আপনার কোলে একটা ছেলে থাকবে।” কিন্তু তিনি বললেন, “না; হে প্রভু, হে ঈশ্বরের লোক, আপনার দাসীকে মিথ্যা কথা বলবেন না।”
17 उस स्त्री ने गर्भधारण किया और अगले साल उसी समय वसन्त के मौसम में उसने एक पुत्र को जन्म दिया—ठीक जैसा एलीशा ने उससे कहा था.
১৭পরে ইলীশায়ের বাক্য অনুসারে সেই স্ত্রীলোকটী গর্ভবতী হয়ে সেই একই দিন উপস্থিত হলে তিনি ছেলের জন্ম দিলেন।
18 बड़ा होता हुआ वह बालक, एक दिन कटनी कर रहे मजदूरों के बीच अपने पिता के पास चला गया.
১৮ছেলেটি বড় হওয়ার পর একদিন তার বাবা যখন ফসল কাটবার লোকদের সঙ্গে ছিলেন, তখন সে তার বাবার কাছে গেল।
19 अचानक उसने अपने पिता से कहा, “अरे, मेरा सिर! मेरा सिर!” पिता ने अपने सेवक को आदेश दिया, “इसे इसकी माता के पास ले जाओ.”
১৯পরে সে বাবাকে বলল, “আমার মাথা, আমার মাথা।” তার বাবা একজন চাকরকে বললেন, “তুমি ওকে তুলে ওর মায়ের কাছে নিয়ে যাও।”
20 सेवक ने उस बालक को उठाया और उसकी माता के पास ले गया. वह बालक दोपहर तक अपनी माता की गोद में ही बैठा रहा और वहीं उसकी मृत्यु हो गई.
২০পরে সে তাকে তুলে নিয়ে মায়ের কাছে আনলে ছেলেটি দুপুর পর্যন্ত মায়ের কোলে বসে থাকল, তারপর মারা গেল।
21 उस स्त्री ने बालक को ऊपर ले जाकर उस परमेश्वर के जन के बिछौने पर लिटा दिया और दरवाजा बंद करके चली गई.
২১তখন মা উপরে গিয়ে ঈশ্বরের লোকের বিছানায় তাকে শুইয়ে দিয়ে দরজা বন্ধ করে বেরিয়ে এলেন।
22 तब उसने अपने पति को यह संदेश भेजा, “मेरे पास अपना एक सेवक और गधा भेज दीजिए कि मैं जल्दी ही परमेश्वर के जन से भेंटकर लौट आऊं.”
২২তারপর তাঁর স্বামীকে ডেকে বললেন, “অনুরোধ করি, তুমি একজন চাকর ও একটা গর্দ্দভী আমার কাছে পাঠিয়ে দাও, আমি তাড়াতাড়ি ঈশ্বরের লোকের কাছে গিয়ে ফিরে আসব।”
23 पति ने प्रश्न किया, “तुम आज ही क्यों जाना चाह रही हो? आज न तो नया चांद है, और न ही शब्बाथ.” उसका उत्तर था, “सब कुछ कुशल ही होगा.”
২৩তিনি বললেন, “তাঁর কাছে আজকে যাবে কেন? আজকে তো অমাবস্যাও নয়, বিশ্রামবারও নয়।” মহিলাটি বললেন, “মঙ্গল হবে।”
24 तब उसने गधे को तैयार किया और अपने सेवक को आदेश दिया, “गधे को तेज हांको! मेरे लिए रफ़्तार धीमी न होने पाए, जब तक मैं इसके लिए आदेश न दूं.”
২৪তারপর তিনি গর্দ্দভী সাজিয়ে তাঁর চাকরকে বললেন, “গর্দ্দভী চালিয়ে চল, আমি না বললে আস্তে চালাবে না।”
25 वह चल पड़ी और कर्मेल पर्वत पर परमेश्वर के जन के घर तक पहुंच गई. जब परमेश्वर के जन ने उसे अपनी ओर आते देखा, उन्होंने अपने सेवक गेहज़ी से कहा, “वह देखो! शूनामी स्त्री!
২৫পরে তিনি কর্মিল পর্বতে ঈশ্বরের লোকের কাছে চললেন। তখন তাঁকে দূর থেকে দেখে ঈশ্বরের লোক তাঁর চাকর গেহসিকে বললেন, “দেখ, সেই শূনেমীয়া।
26 तुरंत उससे मिलने के लिए दौड़ो और उससे पूछो, ‘क्या आप सकुशल हैं? क्या आपके पति सकुशल हैं? क्या आपका पुत्र सकुशल है?’” उसने उसे उत्तर दिया, “सभी कुछ सकुशल है.”
২৬তুমি দৌড়ে তাঁর কাছে গিয়ে তাঁর সঙ্গে দেখা করে জিজ্ঞাসা কর যে, ‘আপনি, আপনার স্বামী ও আপনার ছেলে সবাই ঠিক আছেন’?” উত্তরে তিনি বললেন, “সবাই ভাল আছে।”
27 तब, जैसे ही वह पर्वत पर परमेश्वर के जन के पास पहुंची, उसने एलीशा के पैर पकड़ लिए. जब गेहज़ी उसे हटाने वहां पहुंचा, परमेश्वर के जन ने उससे कहा, “ऐसा कुछ न करो, क्योंकि इसका मन भारी दर्द से भरा हुआ है. इसके बारे में मुझे याहवेह ने कोई सूचना नहीं दी है, इसे गुप्त ही रखा है.”
২৭পরে পর্বতে ঈশ্বরের লোকের কাছে উপস্থিত হয়ে তিনি তাঁর পা জড়িয়ে ধরলেন; তাতে গেহসি তাঁকে সরিয়ে দেবার জন্য কাছে আসলে ঈশ্বরের লোক বললেন, “ওঁনাকে থাকতে দাও। ওঁনার মনে খুব কষ্ট হয়েছে, আর সদাপ্রভু আমার কাছ থেকে তা লুকিয়ে রেখেছেন, আমাকে জানান নি।”
28 तब उस स्त्री ने कहना शुरू किया, “क्या अपने स्वामी से पुत्र की विनती मैंने की थी? क्या मैंने न कहा था, ‘मुझे झूठी आशा न दीजिए?’”
২৮তখন স্ত্রীলোকটী বললেন, “আমার প্রভুর কাছে আমি কি ছেলে চেয়েছিলাম? আমি কি আপনাকে বলি নি যে, আমার সাথে ছলনা করবেন না?”
29 एलीशा ने गेहज़ी को आदेश दिया, “कमर कस लो और अपने साथ मेरी लाठी ले लो और चल पड़ो! मार्ग में अगर कोई मिले तो उससे हाल-चाल जानने के लिए न रुकना. यदि तुम्हें कोई नमस्कार करे तो उसका उत्तर न देना. जाकर मेरी लाठी उस बालक के मुंह पर रख देना.”
২৯তখন ইলীশায় গেহসিকে বললেন, “কোমর বেঁধে নাও, আমার এই লাঠিটি হাতে নিয়ে যাও; কারও সঙ্গে দেখা হলে তাকে শুভেচ্ছা জানাবে না এবং কেউ শুভেচ্ছা জানালে তার উত্তরও দেবে না; পরে আমার এই লাঠিটি ছেলেটির মুখের উপর রেখে দিয়ো।”
30 तब बालक की माता ने एलीशा से कहा, “जीवित याहवेह की शपथ और आपकी शपथ, मैं आपके बिना न लौटूंगी!” तब एलीशा उठे और उस स्त्री के साथ चल दिए.
৩০তখন ছেলেটির মা বললেন, “জীবন্ত সদাপ্রভুর ও আপনার প্রাণের দিব্যি, আমি আপনাকে ছাড়ব না।” কাজেই ইলীশায় উঠে তাঁর পিছনে পিছনে চললেন।
31 गेहज़ी ने आगे-आगे जाकर बालक के मुंह पर लाठी टिका दी, मगर वहां न तो कोई आवाज सुनाई दिया गया और न ही उसमें जीवन का कोई लक्षण दिखाई दिया. तब गेहज़ी ने लौटकर एलीशा को ख़बर दी, “बालक तो जागा ही नहीं!”
৩১ইতিমধ্যে গেহসি তাঁদের আগে গিয়ে ছেলেটির মুখের উপর লাঠিটি রাখল, কিন্তু কোনো শব্দ হল না, কোনো সাড়াও পাওয়া গেল না। তাই গেহসি ইলীশায়ের সঙ্গে দেখা করবার জন্য ফিরে গিয়ে তাঁকে বলল, “ছেলেটি জাগে নি।”
32 जब एलीशा ने घर में प्रवेश किया, वह मरा हुआ बालक उनके ही बिछौने पर ही लिटाया हुआ था.
৩২পরে ইলীশায় সেই গৃহে এসে দেখলেন তাঁরই বিছানার উপর মৃত ছেলেটি শোয়ানো রয়েছে।
33 तब एलीशा कमरे के भीतर चले गए और दरवाजा बंद कर लिया, वे दोनों बाहर ही थे. एलीशा ने याहवेह से प्रार्थना की.
৩৩তখন তিনি গৃহে ঢুকলেন এবং তাদের দুজনকে বাইরে রেখে দরজা বন্ধ করে সদাপ্রভুর কাছে প্রার্থনা করলেন।
34 तब वह जाकर बालक के ऊपर लेट गए. उन्होंने अपना मुख बालक के मुख पर रखा, उनकी आंखें बालक की आंखों पर थी और उनके हाथ बालक के हाथों पर. जब वह उस बालक पर लेट गए, तब बालक के शरीर में गर्मी आने लगी.
৩৪তারপর তিনি বিছানার উপর উঠে ছেলেটির উপরে শুলেন; তিনি তার মুখের উপরে নিজের মুখ, চোখের উপরে চোখ এবং হাতের উপরে হাত রেখে তার উপর নিজে লম্বা হয়ে শুলেন; তাতে ছেলেটির গা গরম হয়ে উঠল।
35 फिर वह नीचे उतरे और घर के भीतर ही टहलते रहे. तब वह दोबारा बिछौने पर चढ़ गए और बालक पर लेट गए. इससे उस बालक को सात बार छींक आई और उसने आंखें खोल दीं.
৩৫তারপর তিনি ফিরে এসে ঘরের মধ্যে পায়চারি করতে লাগলেন, আবার উঠে তার উপর লম্বা হয়ে শুলেন; তাতে ছেলেটি সাতবার হাঁচি দিয়ে চোখ খুলল।
36 एलीशा ने गेहज़ी को पुकारा और आदेश दिया, “शूनामी स्त्री को बुलाओ.” तब गेहज़ी ने उसे पुकारा. जब वह भीतर आई, उन्होंने उस स्त्री से कहा, “उठा लो अपने पुत्र को.”
৩৬তখন তিনি গেহসিকে ডেকে বললেন, “ঐ শূনেমীয়াকে ডাক।” সে তাঁকে ডাকলে স্ত্রীলোকটী তাঁর কাছে আসলেন। ইলীশায় বললেন, “আপনার ছেলেকে তুলে নিন।”
37 वह आई और भूमि की ओर झुककर एलीशा के पैरों पर गिर पड़ी. इसके बाद उसने अपने पुत्र को गोद में उठाया और वहां से चली गई.
৩৭তখন সেই স্ত্রীলোকটী কাছে গিয়ে তাঁর পায়ে পড়ে মাটিতে মাথা ঠেকিয়ে তাঁকে প্রণাম করলেন এবং তাঁর ছেলেকে তুলে নিয়ে তিনি বেরিয়ে গেলেন।
38 एलीशा दोबारा गिलगाल नगर को लौट गए. इस समय देश में अकाल फैला था. भविष्यद्वक्ता मंडल इस समय उनके सामने बैठा हुआ था. एलीशा ने अपने सेवक को आदेश दिया, “एक बड़े बर्तन में भविष्यद्वक्ता मंडल के लिए भोजन तैयार करो!”
৩৮ইলীশায় আবার গিল্গলে ফিরে গেলেন। তখন দেশে দূর্ভিক্ষ চলছিল। তখন ভাববাদীদের সন্তানেরা তাঁর সঙ্গে বসে ছিল; তিনি তাঁর চাকরকে আদেশ দিলেন, “বড় হাঁড়ি চাপিয়ে এদের জন্য কিছু তরকারি রান্না কর।”
39 एक भविष्यद्वक्ता ने बाहर जाकर खेतों में से कुछ साग-पात इकट्ठा किया. वहीं उसे एक जंगली लता भी दिखाई दी, जिससे उसने बड़ी संख्या में जंगली फल इकट्ठा कर लिए. उसने इन्हें काटकर पकाने के बर्तन में डाल दिया. उसे यह मालूम न था कि ये फल क्या थे.
৩৯তখন তাদের একজন তরকারী সংগ্রহ করতে মাঠে গিয়ে বুনো শশার লতা দেখতে পেয়ে তার বুনো ফল কাপড় ভর্তি করে এনে তা কেটে তরকারির হাঁড়িতে দিল; কিন্তু সেগুলো কি তা কারোর জানা ছিল না।
40 जब परोसने के लिए भोजन निकाला गया और जैसे ही उन्होंने भोजन खाना शुरू किया, वे चिल्ला उठे, “परमेश्वर के जन, इस हांड़ी में मौत है!” वे भोजन न कर सके.
৪০পরে লোকদের খেতে দেওয়ার জন্য ঢালা হলে তারা সেই তরকারী খেতে গিয়ে চিৎকার করে বলল, “হে ঈশ্বরের লোক, হাঁড়ির মধ্যে মৃত্যু!” তারা তা খেতে পারল না।
41 एलीशा ने आदेश दिया, “थोड़ा आटा ले आओ.” उन्होंने उस आटे को उस बर्तन में डाला और कहा, “अब इसे इन्हें परोस दो, कि वे इसे खा सके.” बर्तन का भोजन खाने योग्य हो चुका था.
৪১তখন তিনি বললেন, “কিছু ময়দা নিয়ে এস।” তখন তিনি হাঁড়ির মধ্যে তা ফেলে দিয়ে বললেন, “লোকেদের জন্য ঢেলে দাও, তারা খেয়ে দেখুক।” এতে খারাপ কিছু হাঁড়ির মধ্যে থাকলো না।
42 बाल-शालीशाह नामक स्थान से एक व्यक्ति ने आकर परमेश्वर के जन को उपज के प्रथम फल से बनाई गई बीस जौ की रोटियां और बोरे में कुछ बालें लाकर भेंट में दीं. एलीशा ने आदेश दिया, “यह सब भविष्यद्वक्ता मंडल के भविष्यवक्ताओं में बांट दिया जाए कि वे भोजन कर लें.”
৪২আর বাল্-শালিশা থেকে একজন লোক ঈশ্বরের লোকের জন্য প্রথমে কাটা ফসল থেকে কুড়িটা যবের রুটি সেঁকে নিয়ে আসল, আর তার সঙ্গে নিয়ে আসল কিছু নতুন শস্যের শীষ। আর তিনি বললেন, “এগুলো লোকদের খেতে দাও।”
43 सेवक ने प्रश्न किया, “यह भोजन सौ व्यक्तियों के सामने कैसे रखा जाए?” एलीशा ने अपना आदेश दोहराया, “यह भोजन भविष्यद्वक्ता मंडल के भविष्यवक्ताओं को परोस दो, कि वे इसे खा सकें, क्योंकि यह याहवेह का संदेश है, ‘उनके खा चुकने के बाद भी कुछ भोजन बाकी रह जाएगा.’”
৪৩তখন তাঁর পরিচারক বলল, “আমি কি একশো জন লোককে এটি পরিবেশন করব?” কিন্তু ইলীশায় বললেন, “এই লোকদের খেতে দাও; কারণ সদাপ্রভু এই কথা বলেন, ‘তারা খাবে ও কিছু বাকীও থাকবে’।”
44 तब सेवक ने भोजन परोस दिया. वे खाकर तृप्त हुए और कुछ भोजन बाकी भी रह गया; जैसा याहवेह ने कहा था.
৪৪অতএব তার দাস তাদের সামনে তা রাখল, আর সদাপ্রভুর বাক্য অনুযায়ী তারা খেল আবার কিছু বাকীও রেখে দিল।