< 2 शमूएल 7 >

1 जब राजा अपने महल में बस गया और याहवेह ने उन्हें उनके सभी शत्रुओं से शांति प्रदान कर दी.
Und [1. Chron. 17] es geschah, als der König in seinem Hause wohnte, und Jehova ihm ringsumher Ruhe geschafft hatte vor allen seinen Feinden,
2 राजा ने भविष्यद्वक्ता नाथान पर अपनी यह इच्छा प्रकट की: अब विचार कीजिए, “मैं तो देवदार से बने भव्य घर में निवास कर रहा हूं, जबकि परमेश्वर का संदूक तंबू और पर्दों में.”
da sprach der König zu Nathan, dem Propheten: Siehe doch, ich wohne in einem Hause von Cedern, und die Lade Gottes wohnt unter Teppichen.
3 नाथान ने राजा को उत्तर दिया, “आप वह सब कीजिए, जो आपने अपने मन में विचार किया है. क्योंकि याहवेह आपके साथ हैं.”
Und Nathan sprach zu dem König: Gehe hin, tue alles, was du im Herzen hast, denn Jehova ist mit dir.
4 उसी रात याहवेह का वचन नाथान को प्राप्‍त हुआ:
Und es geschah in selbiger Nacht, da geschah das Wort Jehovas zu Nathan also:
5 “मेरे सेवक दावीद से जाकर यह कहना, ‘याहवेह का कथन है: क्या तुम्हीं वह हो, जो मेरे रहने के लिए भवन बनाएगा?
Gehe hin und sprich zu meinem Knechte, zu David: So spricht Jehova: Solltest du mir ein Haus bauen zu meiner Wohnung?
6 जब से मैंने इस्राएलियों को मिस्र से बाहर निकाला है, आज तक मैं किसी भवन में नहीं रहा हूं, हां, मैं तंबू मेरा निवास बनाकर रहता आया हूं,
denn ich habe nicht in einem Hause gewohnt von dem Tage an, da ich die Kinder Israel aus Ägypten heraufgeführt habe, bis auf diesen Tag; sondern ich wanderte umher in einem Zelte [Dasselbe Wort wie in 2. Mose 26,7 usw.] und in einer Wohnung. [Dasselbe Wort wie in 2. Mose 26,7]
7 जिधर जिधर इस्राएल के साथ मैं फिरा, क्या मैंने इस्राएल के किसी शासक से, जिसे मैंने अपनी प्रजा के चरवाहा नियुक्त किया था, कभी कहा, “तुमने मेरे लिए देवदार की लकड़ी का घर क्यों नहीं बनाया?”’
Wo immer ich wanderte unter allen Kindern Israel, habe ich wohl zu einem der Stämme [Viell. ist hier "Richter" zu lesen, wie in 1. Chron. 17,6] Israels, dem ich gebot, mein Volk Israel zu weiden, ein Wort geredet und gesagt: Warum habt ihr mir nicht ein Haus von Cedern gebaut?
8 “तब तुम्हें अब मेरे सेवक दावीद से यह कहना होगा, ‘सेनाओं के याहवेह का वचन है, मैंने ही तुम्हें चरागाह से, भेड़ों के चरवाहे के पद पर इसलिये चुना कि तुम्हें अपनी प्रजा इस्राएल का शासक बनाऊं.
Und nun sollst du also zu meinem Knechte David sagen: So spricht Jehova der Heerscharen: Ich habe dich von der Trift genommen, hinter dem Kleinvieh weg, daß du Fürst sein solltest über mein Volk, über Israel;
9 तुम जहां कहीं गए, मैं तुम्हारे साथ था. तुम्हारे सामने से तुम्हारे सारे शत्रुओं को मैंने मार गिराया. मैं तुम्हारे नाम को ऐसा बड़ा करूंगा, जैसा पृथ्वी पर महान लोगों का होता है.
und ich bin mit dir gewesen überall, wohin du gezogen bist, und habe alle deine Feinde vor dir ausgerottet; und ich habe dir einen großen Namen gemacht, [O. und ich werde dir machen] gleich dem Namen der Großen, die auf Erden sind.
10 अपनी प्रजा इस्राएल के लिए मैं एक जगह तय करूंगा, मैं उन्हें वहां बसाऊंगा कि वे वहां अपने ही घरों में रह सकें, और उन्हें वहां से चलाया न जाए, और कोई भी दुष्ट व्यक्ति उन्हें पहले के समान परेशान न करे.
Und ich werde einen Ort setzen für mein Volk, für Israel, und werde es pflanzen, daß es an seiner Stätte wohne und nicht mehr beunruhigt werde, und die Söhne der Ungerechtigkeit sollen es nicht mehr bedrücken, wie früher
11 जैसे वे मेरे द्वारा उत्पीड़ित किए जाते थे. मैं तुम्हें तुम्हारे सभी शत्रुओं से शांति दूंगा. “‘इसके अलावा, तुम्हारे लिए याहवेह की यह घोषणा है कि याहवेह तुम्हारे वंशपरंपरा को स्थिर करेंगे.
und seit dem Tage, da ich Richter über mein Volk Israel bestellt habe. Und ich habe dir Ruhe geschafft vor allen deinen Feinden; und Jehova tut dir kund, daß Jehova dir ein Haus machen wird.
12 जब तुम्हारी आयु के निर्धारित दिन पूर्ण हो जाएंगे और तुम अपने पूर्वजों के साथ चिर-निद्रा में सो जाओगे, मैं तुम्हारी संतान को तुम्हारे बाद पल्लवित करूंगा, जो तुम्हारी ही देह से उत्पन्‍न होगा. मैं उसके साम्राज्य को प्रतिष्ठित करूंगा.
Wenn deine Tage voll sein werden, und du bei deinen Vätern liegen wirst, so werde ich deinen Samen nach dir erwecken, der aus deinem Leibe kommen soll, und werde sein Königtum befestigen.
13 वही मेरी प्रतिष्ठा में भवन बनाएगा. मैं उसका राज सिंहासन चिरस्थायी करूंगा.
Der wird meinem Namen ein Haus bauen; und ich werde den Thron seines Königtums befestigen auf ewig.
14 उसका पिता मैं बन जाऊंगा, और वह हो जाएगा मेरा पुत्र. जब उससे कोई अपराध होगा, मैं उसे मनुष्यों की रीति पर छड़ी से अनुशासित करूंगा, वैसे ही जैसे मनुष्य अपनी संतान को प्रताड़ित करते हैं.
Ich will ihm Vater sein, und er soll mir Sohn sein, so daß, wenn er verkehrt handelt, ich ihn züchtigen werde mit einer Menschenrute und mit Schlägen der Menschenkinder;
15 मगर उसके प्रति मेरा अपार प्रेम कभी कमजोर न होगा, जैसा शाऊल से मेरा प्रेम जाता रहा था, जिसे मैंने ही तुम्हारे पथ से हटा दिया.
aber meine Güte soll nicht von ihm weichen, wie ich sie von Saul weichen ließ, den ich vor dir weggetan habe.
16 तुम्हारा वंश और तुम्हारा साम्राज्य निश्चित, मेरे सामने सदा स्थायी रहेगा. तुम्हारा सिंहासन हमेशा प्रतिष्ठित बना रहेगा.’”
Und dein Haus und dein Königtum sollen vor dir beständig sein auf ewig, dein Thron soll fest sein auf ewig.
17 नाथान ने अपने दर्शन और याहवेह के संदेश के अनुसार दावीद को सब कुछ बता दिया.
Nach allen diesen Worten und nach diesem ganzen Gesicht, also redete Nathan zu David.
18 तब राजा दावीद जाकर याहवेह के सामने बैठ गए. वहां उनके हृदय से निकले वचन ये थे: “प्रभु याहवेह, कौन हूं, मैं और क्या है मेरे परिवार का पद, कि आप मुझे इस जगह तक ले आए हैं?
Da ging der König David hinein und setzte sich vor Jehova nieder und sprach: Wer bin ich, Herr, Jehova, und was ist mein Haus, daß du mich bis hierher gebracht hast?
19 और प्रभु याहवेह, मानो यह आपकी दृष्टि में पर्याप्‍त नहीं था, आपने मेरे वंशजों के दूर के भविष्य के विषय में भी प्रतिज्ञा कर दी है. प्रभु परमेश्वर, यह सब केवल मिट्टी मात्र मनुष्य के लिए!
Und dies ist noch ein Geringes gewesen in deinen Augen, Herr, Jehova! und du hast auch von dem Hause deines Knechtes geredet in die Ferne hin; und ist dies die Weise des Menschen, Herr, Jehova? [O. und dies nach Menschenweise, Herr, Jehova! [vergl. 1. Chron. 17,17]]
20 “दावीद इसके अलावा आपसे और क्या विनती कर सकता है? क्योंकि प्रभु याहवेह, आप अपने सेवक को जानते हैं.
Doch was soll David noch weiter zu dir reden? Du kennst ja deinen Knecht, Herr, Jehova!
21 अपनी प्रतिज्ञा के कारण और अपनी योजना के अनुसार, आपने मुझे इस ऊंचाई तक पहुंचा दिया है, कि आपके सेवक को आश्वासन मिल सके.
Um deines Wortes willen und nach deinem Herzen hast du all dieses Große getan, um es deinem Knechte kundzutun.
22 “इसलिये, प्रभु याहवेह, आप ऐसे महान हैं! कोई भी नहीं है आपके तुल्य! हमने जो कुछ अपने कानों से सुना है, उसके अनुसार कोई भी परमेश्वर नहीं है आपके अलावा.
Darum bist du groß, Jehova Gott! denn niemand ist dir gleich, und kein Gott außer dir, nach allem, was wir mit unseren Ohren gehört haben.
23 इसी प्रकार, कौन है आपकी प्रजा इस्राएल के तुल्य? पृथ्वी पर एक जनता, जिसे स्वयं परमेश्वर ने जाकर इसलिये छुड़ाया, कि वे उनकी प्रजा हो, कि इसमें आपकी प्रतिष्ठा हो. आपने अपनी प्रजा के सामने से अन्य राष्ट्रों को निकाल दिया—उसी प्रजा के सामने से, जिसे आपने मिस्र देश की बंधनों से विमुक्त किया है, कि वे इन राष्ट्रों और विदेशी देवताओं को छोड़ आपकी प्रजा हों.
Und wer ist wie dein Volk, wie Israel, die einzige Nation auf Erden, welche [O. und welche Nation gibt es irgend auf Erden wie dein Volk, wie Israel, welches usw.] Gott hingegangen ist, sich zum Volke zu erlösen, und um sich einen Namen zu machen, und für sie [W. für euch] solch Großes zu tun und furchtbare Dinge für dein Land, indem du vor deinem Volke, das du dir aus Ägypten erlöst hast, Nationen und ihre Götter vertriebst! [Vergl. 1. Chron. 17,21]
24 आपने अपने ही लिए अपनी प्रजा इस्राएल को प्रतिष्ठित किया है कि वे सदा-सर्वदा के लिए आपकी प्रजा रहें. और, तब याहवेह, आप उनके परमेश्वर हो गए.
Und du hast dir dein Volk Israel befestigt, dir zum Volke auf ewig; und du, Jehova, bist ihr Gott [Eig. ihnen zum Gott] geworden.
25 “और अब, याहवेह परमेश्वर, अपने सेवक और उसके वंश के विषय में कहे गए वचन को हमेशा के लिए प्रतिष्ठित कर दीजिए, और जो कुछ आपने कहा है, उन्हें पूरा कीजिए.
Und nun, Jehova Gott, das Wort, das du über deinen Knecht und über sein Haus geredet hast, halte aufrecht ewiglich, und tue, wie du geredet hast!
26 आपकी महिमा के लिए, यह हमेशा के लिए किया जाता रहेगा. आपके विषय में कहा जाएगा, सर्वशक्तिमान याहवेह ही इस्राएल के परमेश्वर है; आपके सामने आपके सेवक दावीद का राजवंश हमेशा स्थायी रहेगा.
Und dein Name sei groß [O. erhoben] auf ewig, daß man spreche: Jehova der Heerscharen ist Gott über Israel. Und das Haus deines Knechtes David sei fest vor dir.
27 “यह इसलिये कि सर्वशक्तिमान याहवेह, आपने, इस्राएल के परमेश्वर ही ने, अपने सेवक पर इन शब्दों में यह प्रकाशित किया है, ‘मैं तुम्हारे वंश को प्रतिष्ठित करूंगा.’ इसी बात के प्रकाश में आपके सेवक को इस प्रकार की प्रार्थना करने का साहस प्राप्‍त हुआ है.
Denn du, Jehova der Heerscharen, Gott Israels, hast dem Ohre deines Knechtes eröffnet und gesagt: Ich werde dir ein Haus bauen; darum hat dein Knecht sich ein Herz gefaßt, dieses Gebet zu dir zu beten.
28 प्रभु याहवेह, आप परमेश्वर हैं! आपके मुख से निकले शब्द सत्य हैं. आपने अपने सेवक से यह असाधारण प्रतिज्ञा की हैं.
Und nun, Herr, Jehova, du bist es, der da Gott ist, [O. du bist, der da ist, [w. du bist er, oder derselbe] der Gott] und deine Worte sind Wahrheit, und du hast dieses Gute zu deinem Knechte geredet.
29 तब आपके सेवक के वंश पर आपकी कृपादृष्टि बनाए रखने में आप प्रभु याहवेह की संतुष्टि हो, कि यह वंश आपके सामने हमेशा आगे ही बढ़ता जाए; क्योंकि यह आपने ही कहा है. आपके आशीर्वाद से आपके सेवक का वंश हमेशा के लिए आशीषित हो जाए.”
So laß es dir nun gefallen und segne das Haus deines Knechtes, daß es ewiglich vor dir sei; denn du, Herr, Jehova, hast geredet, und so werde mit deinem Segen das Haus deines Knechtes gesegnet ewiglich!

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